सतना जिले के 267 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को दो वर्षों से 4 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। नाराज सीएचओ ने जिला लेखा प्रबंधक कार्यालय का घेराव कर चेतावनी दी कि मार्च तक भुगतान नहीं हुआ तो ऑनलाइन कार्य बंद करेंगे।
सतना जिले के परसमनिया पीएचसी में चौंकाने वाला मामला सामने आया। रिकॉर्ड में मेडिकल ऑफिसर की सिर्फ 70 दिन उपस्थिति, लेकिन 3 हजार ओपीडी और 4 हजार ब्लड टेस्ट दर्ज। मिशन डायरेक्टर ने जांच के निर्देश दिए।
भोपाल के जेपी अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन। नियमितीकरण और 21000 न्यूनतम वेतन सहित 9 सूत्रीय मांगों को लेकर न्याय यात्रा। एक महिला कर्मचारी बेहोश।
सतना जिला अस्पताल में समय से पहले डिस्चार्ज और कमीशन के आरोप, 22 आशा कार्यकर्ताओं के नाम सार्वजनिक, जांच तेज।
सतना में स्वास्थ्य योजनाओं की कमजोर प्रगति पर सीएमएचओ के निर्देश पर आठ आशाओं को शोकाज और सात सेक्टर सुपरवाइजरों को चेतावनी पत्र जारी।
मध्य प्रदेश में शुक्रवार रात 11 IAS और 4 SAS अफसरों के तबादले। मनीष सिंह को जनसंपर्क और परिवहन की कमान, अशोक वर्णवाल बने स्वास्थ्य सचिव। देखें पूरी ट्रांसफर लिस्ट।
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 23 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि कई मरीज अब भी वेंटिलेटर और आईसीयू में जीवन और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
अमरपाटन और मैहर क्षेत्र में संक्रामक रोगों व एनसीडी पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज न करने पर कई सीएचओ के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। दो सीएचओ को तीन दिन में स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस जारी हुआ है, जबकि दस सीएचओ के वेतन कटौती के आदेश दिए गए हैं। साथ ही टीबी खोज अभियान में कम उपलब्धि पर सभी सीएचओ को चेतावनी पत्र जारी कर चार दिन में लक्ष्य पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मध्य प्रदेश के सागर जिले के पड़रई गांव में उल्टी-दस्त फैलने से हड़कंप मच गया है, जिसमें एक गर्भवती महिला समेत दो लोगों की मौत हो गई है। कई अन्य बीमार, स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाकर शुरू की जांच और जल स्रोतों में दवाओं का छिड़काव।
रीवा की डॉक्टर कॉलोनी में सरकारी बंगले और आवासों को अवैध क्लीनिक व पैथालॉजी सेंटर में बदल दिया गया है। बिना पंजीयन डॉक्टर न केवल मरीजों का इलाज कर रहे हैं बल्कि ऑपरेशन और जांच तक कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले पर मौन है। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा भी निजी प्रैक्टिस की जा रही है, जबकि नियमों के तहत यह प्रतिबंधित है। अगर इन अवैध क्लीनिकों से किसी मरीज की जान जाती है, तो जिम्मेदारी कौन लेगा — यह बड़ा सवाल बना हुआ है।






















